लो अब याद आने लगा वो समा जब किसी ने कहा था मुझे सब पता है
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है इस का मतलब है जा चुके हो तुम
Zubair Ali Tabish
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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पहले जैसे मिरे हालात से डरता हूँ मैं अब मुहब्बत की तो हर बात से डरता हूँ मैं
Atif khan
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मेरे हालात क्यूँ न समझा वो मेरे जज़्बात क्यूँ न समझा वो मैं मुहब्बत नहीं दिखाता हूँ इतनी सी बात क्यूँ न समझा वो
Atif khan
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यार तुम भी कमाल करते हो फिर बुरा मेरा हाल करते हो वक़्त पर ख़ुद कभी नहीं मिलते और मुझ से मलाल करते हो
Atif khan
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है ज़माना बस रही ख़िल्क़त नहीं है फ़साना बस रही लज़्ज़त नहीं
Atif khan
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आज अंजान वो राहें थीं फैली जिन में कभी बाँहें थीं
Atif khan
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