आज अंजान वो राहें थीं फैली जिन में कभी बाँहें थीं
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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मेरे हालात क्यूँ न समझा वो मेरे जज़्बात क्यूँ न समझा वो मैं मुहब्बत नहीं दिखाता हूँ इतनी सी बात क्यूँ न समझा वो
Atif khan
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यार तुम भी कमाल करते हो फिर बुरा मेरा हाल करते हो वक़्त पर ख़ुद कभी नहीं मिलते और मुझ से मलाल करते हो
Atif khan
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पहले जैसे मिरे हालात से डरता हूँ मैं अब मुहब्बत की तो हर बात से डरता हूँ मैं
Atif khan
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लो अब याद आने लगा वो समा जब किसी ने कहा था मुझे सब पता है
Atif khan
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उस इमारत में कहीं पर सीढ़ियों के सामने वो जहाँ तन्हा मिला मुझ सेे वो कमरा याद है
Atif khan
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