मछलियाँ आ गई मुहाने पर मिरे हाथों में जाल दे कोई
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें मुझ सेे मोहब्बत हो गई है अरे पहले बताना चाहिए था
Shivsagar Sahar
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हमारी महफ़िलें शेर-ओ-सुख़न की दिलों को जोड़कर आबाद होंगी
Shivsagar Sahar
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कभी तो अपनी तरफ़ भी देखो वफ़ा जो हम को सिखा रहे हो
Shivsagar Sahar
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आज बच्चे उदास होंगे ही बाप ने टॉफ़ियाँ नहीं ली हैं
Shivsagar Sahar
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दोस्त मजबूरियाँ नहीं होती आपसे दूरियाँ नहीं होती
Shivsagar Sahar
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