मैं कभी कहता नहीं तुम सेे मगर तुम ने पूछा भी नहीं दर्द ए जिगर जिस पे गुज़री है वही है जनता तुम को कैसे हो मेरे दिल की ख़बर
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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मुख़लिस रहे सख़ी भी रहे मोतबर रहे हर शख़्स की नज़र में मगर मुख़्तसर रहे उस ने बस एक बार में दीवाना कर दिया हम लाख कोशिशों के इवज़ बे-असर रहे
Hameed Sarwar Bahraichi
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कैसा मंज़र था उन की आँखों में इक समुंदर था उन की आँखों में
Hameed Sarwar Bahraichi
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कमाल ये नहीं उस को भुला चुका हूँ मैं कमाल ये है बहुत दूर जा चुका हूँ मैं वो छोड़ कर के गया जिस मुक़ाम पर मुझ को उसी मुक़ाम को मंज़िल बना चुका हूँ मैं
Hameed Sarwar Bahraichi
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न ये पागल सा मजनू है, न अब फ़रहाद लगता है पस-ए-मुश्किल, हमारा दिल बड़ा ही शाद लगता है
Hameed Sarwar Bahraichi
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चश्म-ओ-दिल में नहीं है यक-रंगी आदमी ख़ुद में इक मुनाफ़िक़ है
Hameed Sarwar Bahraichi
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