मैं पहले भी तो तुम से ये कह चुका हूँ मुश्किल से शब-ए-हिज्र को सह चुका हूँ कभी नींव पक्की मोहब्बत की थी जिस की वही मैं किला हूँ जो अब ढ़ह चुका हूँ
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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तुम मुझे चर्चों में मेरे बा'द रखना याद आऊं मुझ को ऐसे याद रखना
Kohar
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ज़ख़्म अपनों से मिले है ग़ैर पूछे हाल मेरा
Kohar
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ज़िक्र अब भी मेरा किया होगा नाम इक मरतबा लिया होगा ग़म उसे ना सहें गए हो जब जाम पे जाम फिर पिया होगा
Kohar
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मैं सब से हंस के बातें करता हूँ मैं अब भी उस से बातें करता हूँ
Kohar
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उस को मुझ सेे दूरी पर रख कर अब मैं तन्हा अपनी रातें करता हूँ
Kohar
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