कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मुझ से दामन न छुड़ा मुझ को बचा कर रख ले मुझ से इक रोज़ तुझे प्यार भी हो सकता है
Khalil Ur Rehman Qamar
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लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
Khalil Ur Rehman Qamar
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अपनी आँखों में 'क़मर' झाँक के कैसे देखूँ मुझ से देखे हुए मंज़र नहीं देखे जाते
Khalil Ur Rehman Qamar
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वक़्त बदलेगा तो इस बार मैं पूछूँगा उसे तुम बदलते हो तो क्यूँँ लोग बदल जाते हैं
Khalil Ur Rehman Qamar
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एक चेहरे से उतरती हैं नक़ाबें कितनी लोग कितने हमें इक शख़्स में मिल जाते हैं
Khalil Ur Rehman Qamar
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