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लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
Khalil Ur Rehman Qamar30 Likes
लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
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