main us ko dekh ke chup tha usi ki shadi mein maza to sara isi rasm ke nibah mein tha
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मकाँ है क़ब्र जिसे लोग ख़ुद बनाते हैं मैं अपने घर में हूँ या मैं किसी मज़ार में हूँ
Muneer Niyazi
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हम भी 'मुनीर' अब दुनिया-दारी कर के वक़्त गुज़ारेंगे होते होते जीने के भी लाख बहाने आ जाते हैं
Muneer Niyazi
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ख़्वाब होते हैं देखने के लिए उन में जा कर मगर रहा न करो
Muneer Niyazi
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कुछ वक़्त चाहते थे कि सोचें तिरे लिए तू ने वो वक़्त हम को ज़माने नहीं दिया
Muneer Niyazi
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शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं
Muneer Niyazi
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