मन में एक इरादा होता है ताबिश राजा पहले प्यादा होता है ताबिश मानता हूँ मजबूरियाँ थीं कुछ दिक्कत थी पर वा'दा तो वा'दा होता है ताबिश
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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वैसे वो इक फूल है मुझ को भाता है पर ग़ुस्से में पत्थर का हो जाता है
Vishal Singh Tabish
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कहानी में तुम्हारे ज़िक्र भर से मेरा किरदार हल्का हो रहा है
Vishal Singh Tabish
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ये ज़माना ये दौर कुछ भी नहीं बस मोहब्बत है और कुछ भी नहीं
Vishal Singh Tabish
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भूल जाना नहीं रहा ताबिश वो दीवाना नहीं रहा ताबिश ज़िंदगी का सुलूक मेरे साथ दोस्ताना नहीं रहा ताबिश हम की हंसते हैं क्योंकि रोने को कोई शाना नहीं रहा ताबिश
Vishal Singh Tabish
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मेरा किरदार मेरी बात कहाँ सुनता है, ये समझदार मेरी बात कहाँ सुनता है इश्क़ है वा'दा फ़रामोश नहीं है कोई, दिल तलबग़ार मेरी बात कहाँ सुनता है
Vishal Singh Tabish
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