मरना लगा रहेगा यहाँ जी तो लीजिए ऐसा भी क्या परहेज़ ज़रा सी तो लीजिए
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गया मैं इस मज़ाक़ को दिल से लगा के बैठ गया दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया
Zubair Ali Tabish
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है कुछ ऐसा कि जैसे ये सब कुछ इस से पहले भी हो चुका है कहीं
Jaun Elia
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यहाँ दरख़्तों के साए में धूप लगती है चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए
Dushyant Kumar
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आप दस्ताने पहनकर छू रहे हैं आग को आप के भी ख़ून का रंग हो गया है साँवला
Dushyant Kumar
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आज सड़कों पर लिखे हैं सैकड़ों नारे न देख पर अँधेरा देख तू आकाश के तारे न देख
Dushyant Kumar
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धूप ये अठखेलियाँ हर रोज़ करती है एक छाया सीढ़ियाँ चढ़ती उतरती है ये दिया चौरास्ते का ओट में ले लो आज आँधी गाँव से हो कर गुज़रती है
Dushyant Kumar
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वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है माथे पे उस के चोट का गहरा निशान है वो कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तुगू मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है
Dushyant Kumar
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