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मत पूछो मेरी सेहत के बारे में हर दिन बाहर खाना खाना पड़ता है

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शे'र अच्छा तो नहीं है दोस्त पर तेरे चेहरे पे ख़ुशी तो आ गई

Vijay Potter Singhadiya

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शाइ'र हूँ पगली सब को ये ही कहता हूँ तेरे लिए ही तो ये शे'र कहा है मैं ने

Vijay Potter Singhadiya

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तोड़ देगी वो भरोसा, फिर करूँँगा मैं यक़ीं ख़ैर! मैं तो जानता भी हूँ कि दुनिया गोल है

Vijay Potter Singhadiya

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इक मतला इक ताज़ा शे'र सुना लेते हैं बेकारी है तो अब लोग मज़ा लेते हैं शे'र तो क्या तुम यार ग़ज़ल ही चुरा लो मेरी वालिद का जूठा तो बच्चे खा लेते हैं

Vijay Potter Singhadiya

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फ़न आता तो सिखला देता इस में मेरा क्या जाता है मैं ने तो बस इश्क़ किया था मुझ को फ़न-वन नइँ आता है उस को तो अब भी ये लगता है उस ने छोड़ा है मुझ को कोई उसे समझाओ शे'र कभी भी घास नहीं खाता है

Vijay Potter Singhadiya

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