मिरे हर लफ़्ज़ में शामिल कहीं कोई कहानी है कहानी भी वही है जो कई सदियों पुरानी है मैं आया हूँ सितारों के परे से दास्ताँ ले कर यही इक दास्ताँ मुझ को सितारों को सुनानी है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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जी भर गया है अब तो जी भर चाहने वालों से भाग रहा हूँ मैं भी मुझ सेे भागने वालों से
nakul kumar
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इन्हीं पिछले दिनों से कुछ मुझे इस बात का ग़म है अगर मैं रो रहा हूँ तो तिरी क्यूँँ आँख पुर-नम है तिरी तस्वीर है ये रात है बारिश है बादल भी मगर फिर भी न जाने क्यूँँ यहाँ कुछ तो अभी कम है
nakul kumar
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मैं न कहती हूँ कि लाओ चाँद तारे तोड़कर बस मुझे इस हाल में ऐसे न जाओ छोड़कर तुम जो हरदम ही मुझे जान-ओ-जहाँ कहते रहे जा रहे हो ज़िंदगी से क्यूँँ भला मुँह मोड़कर
nakul kumar
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सर्द रात आवारगी ये आशियाँ फ़र्श है सारी ज़मीं छत आसमाँ तू मिरे ज़ेहन-ओ-जहाँ में हर घड़ी मैं तिरी दुनिया में आख़िर हूँ कहाँ
nakul kumar
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कुछ देखता भी है नहीं बाग़-ए-बहार में जो हारता है ज़िन्दगी हर बार प्यार में कह कर गई है कपड़े सुखा दूँ तो बात हो दिन हो गए है सात मैं हूँ इंतिज़ार में
nakul kumar
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