सर्द रात आवारगी ये आशियाँ फ़र्श है सारी ज़मीं छत आसमाँ तू मिरे ज़ेहन-ओ-जहाँ में हर घड़ी मैं तिरी दुनिया में आख़िर हूँ कहाँ
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ये कहाँ की रीत है जागे कोई सोए कोई रात सब की है तो सब को नींद आनी चाहिए
Madan Mohan Danish
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ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई माँगे जो हो परदेस में वो किस सेे रज़ाई माँगे
Rahat Indori
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वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का जो पिछली रात से याद आ रहा है
Nasir Kazmi
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मुस्कुरा बैठे हैं तुझ को मुस्कुराता देख कर वरना तेरी मुस्कराहट की क़सम ग़ुस्से में हैं
Ameer Imam
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अब उदास फिरते हो सर्दियों की शामों में इस तरह तो होता है इस तरह के कामों में
Shoaib Bin Aziz
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कुछ नहीं है ज़िंदगी बर्बाद है अब तो मर गया हूँ मैं मुहब्बत को मनाने में कैसे भी गर हो सके मुझ को रिहा कर दे रह नहीं सकता मैं अब इस क़ैद-ख़ाने में
nakul kumar
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कहो क्या हो गया जो मिल न पाए यार से अपने निहारो चाँद को फिर यार के घर द्वार को देखो
nakul kumar
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तुम्हें जब वक़्त मिल जाए चले आना कभी मिलने उभर आई हैं कुछ बातें वही सब बात करनी हैं तिरी आँखों में रह कर फिर नए कुछ दिन उगाने हैं तिरी ज़ुल्फ़ों तले वो कुछ पुरानी रात करनी हैं
nakul kumar
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जी भर गया है अब तो जी भर चाहने वालों से भाग रहा हूँ मैं भी मुझ सेे भागने वालों से
nakul kumar
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इन्हीं पिछले दिनों से कुछ मुझे इस बात का ग़म है अगर मैं रो रहा हूँ तो तिरी क्यूँँ आँख पुर-नम है तिरी तस्वीर है ये रात है बारिश है बादल भी मगर फिर भी न जाने क्यूँँ यहाँ कुछ तो अभी कम है
nakul kumar
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