मिल जाए ऐ ‘सफ़र’ भी दिल-ओ-जान को सुकूँ ‘ग़ालिब’ के पैरहन का मैं घागा जो हो सकूँ
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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ये दुनिया जो अपनों को भी याद नहीं अब करती है मुझ को याद रखेगी इस उम्मीद पे ही दम तोड़ा हूँ
SHIV SAFAR
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मख़मली बिस्तर तो घर में कल ही मैं ला दूँ मगर सोचता हूँ नींद आँखों में कहाँ से लाऊॅंगा
SHIV SAFAR
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मुझे बेवजह सा है लग रहा जो गुलों पे छाया शबाब है जो न तेरे बालों में लग सका वो गुलाब क्या ही गुलाब है
SHIV SAFAR
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मुद्दत से इतना ख़ामोश रहा हूँ मैं कि गूॅंगों से भी बात मैं अब कर सकता हूँ
SHIV SAFAR
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ख़ुशियाँ तो क्या ही देंगी मसर्रात के सिवा ग़म से मिलो वो देगा तजर्बे नए नए
SHIV SAFAR
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