मीर के ऊला से ग़ालिब का सानी जोड़ दिया बोला ये शे'र सुनो दाद चाहिए मुझ को कोई भी दर्द या फिर ज़ख़्म अता करो यारों शा'इरी के लिए इमदाद चाहिए मुझ को
Related Sher
जौन' उठता है यूँँ कहो या'नी 'मीर'-ओ-'ग़ालिब' का यार उठता है
Jaun Elia
142 likes
क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
116 likes
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
149 likes
तेरे बग़ैर भी जी कर दिखा दिया मैं ने दुआएँ दे तुझे शाइ'र बना दिया मैं ने
Anjum Rehbar
58 likes
तुम भी वैसे थे मगर तुम को ख़ुदा रहने दिया इस तरह तुम को ज़माने से जुदा रहने दिया
Khalil Ur Rehman Qamar
68 likes
More from Amaan mirza
ये सच है मुझ को दिखते नहीं तेरे ऐब-ओ-ख़म दिखने लगी हैं ख़ूबियाँ तू है मुझे पसंद
Amaan mirza
1 likes
न मेरा है न किसी और के बाप का सूरज है इन दिनों तो बुलंदी पे आप का सूरज गुज़र रही है शब ए ग़म इस आस में तन्हा के एक दिन तो उगेगा मिलाप का सूरज
Amaan mirza
0 likes
नज़दीक में रखा मुझे तन्हा नहीं किया कइयों ने मुझ को चाहा पर अपना नहीं किया तुम ने भी भेज दी मेरी जानिब मशकक़तें सुलझे हुए को उलझा के अच्छा नहीं किया
Amaan mirza
1 likes
हँस के मिलते हो और दिल में बुग़्ज़ रखते हो क्या ये सूरत नहीं है दोस्त दोगलेपन की
Amaan mirza
1 likes
बड़ी मुश्क़िल से मियाँ मिलती है इक आसानी लोग आसान समझ लेते हैं आसानी को
Amaan mirza
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Amaan mirza.
Similar Moods
More moods that pair well with Amaan mirza's sher.







