sherKuch Alfaaz

न मेरा है न किसी और के बाप का सूरज है इन दिनों तो बुलंदी पे आप का सूरज गुज़र रही है शब ए ग़म इस आस में तन्हा के एक दिन तो उगेगा मिलाप का सूरज

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ये सच है मुझ को दिखते नहीं तेरे ऐब-ओ-ख़म दिखने लगी हैं ख़ूबियाँ तू है मुझे पसंद

Amaan mirza

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कुछ ऐसे करता है वो मुझ सेे बात आहिस्ता आहिस्ता के मालो ज़र की बढ़ती हो ज़कात आहिस्ता आहिस्ता

Amaan mirza

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नज़दीक में रखा मुझे तन्हा नहीं किया कइयों ने मुझ को चाहा पर अपना नहीं किया तुम ने भी भेज दी मेरी जानिब मशकक़तें सुलझे हुए को उलझा के अच्छा नहीं किया

Amaan mirza

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इज़्ज़त करूँँगा मैं भी रहूँगा लिहाज़ में तू चीख़ता रहेगा अगर एक साज़ में महफ़िल में अच्छी शा'इरी की क्या बढ़ी डिमांड कव्वे भी ख़ुद को गिनने लगे सरफ़राज़ में

Amaan mirza

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नहीं आसान इंसाँ हो के हर इक की ख़बर रखना बहुत सारे तअल्लुक़ टूट जाते हैं तग़ाफुल में

Amaan mirza

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