मिरे किरदार जाने दे नज़रअंदाज कर दे ख़ुदा की फ़िल्म है ये आदमी से क्या शिकायत
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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तेरे जाने के बा'द बस यादें हर तरफ़ याद-याद बस यादें सोना, चाँदी, जमीन, घर सब कुछ हैं मेरी जायदाद बस यादें
Sandeep Thakur
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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सोचता हूँ कि दिल-ए-ज़ार का मतलब क्या है एक हँसते हुए बीमार का मतलब क्या है आप कहते हैं कि दीवार गिरा दी जाए आप की नज़रों में दीवार का मतलब क्या है
Vikram Sharma
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ये कैसे सानिहे अब पेश आने लग गए हैं तेरे आग़ोश में हम छटपटाने लग गए हैं बहुत मुमकिन है कोई तीर हम को आ लगेगा हम ऐसे लोग जो पंछी उड़ाने लग गए हैं
Vikram Sharma
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उम्र के आख़िरी मक़ाम में हम मिल भी जाए तो क्या ख़ुशी होगी क्या सितम तुम को देखने के लिए हम को दुनिया भी देखनी होगी
Vikram Sharma
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फिर से मिलने आ गईं तन्हाइयाँ क्यूँँ नहीं खुलते हैं दफ़्तर रात में
Vikram Sharma
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उदासी जैसे कि उस के बदन का हिस्सा है अधूरा लगता है वो शख़्स अगर उदास न हो
Vikram Sharma
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