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फिर से मिलने आ गईं तन्हाइयाँ क्यूँँ नहीं खुलते हैं दफ़्तर रात में

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मिरे किरदार जाने दे नज़रअंदाज कर दे ख़ुदा की फ़िल्म है ये आदमी से क्या शिकायत

Vikram Sharma

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सोचता हूँ कि दिल-ए-ज़ार का मतलब क्या है एक हँसते हुए बीमार का मतलब क्या है आप कहते हैं कि दीवार गिरा दी जाए आप की नज़रों में दीवार का मतलब क्या है

Vikram Sharma

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उम्र के आख़िरी मक़ाम में हम मिल भी जाए तो क्या ख़ुशी होगी क्या सितम तुम को देखने के लिए हम को दुनिया भी देखनी होगी

Vikram Sharma

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किस काम के वो फूल जो सबने दिए मुझे बेहतर है तेरे हाथ का ख़ंजर लगे मुझे

Vikram Sharma

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ये कैसे सानिहे अब पेश आने लग गए हैं तेरे आग़ोश में हम छटपटाने लग गए हैं बहुत मुमकिन है कोई तीर हम को आ लगेगा हम ऐसे लोग जो पंछी उड़ाने लग गए हैं

Vikram Sharma

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