मिरी वफ़ा का तिरा लुत्फ़ भी जवाब नहीं मिरे शबाब की क़ीमत तिरा शबाब नहीं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो तुम्हें क्या ख़ुद मुझे भी ग़म नहीं है
Asrar Ul Haq Majaz
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कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी कुछ मुझे भी ख़राब होना था
Asrar Ul Haq Majaz
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छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है
Asrar Ul Haq Majaz
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तुम ने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया किस दिल से आह तर्क-ए-तमन्ना करे कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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नहीं हर चंद किसी गुम-शुदा जन्नत की तलाश इक न इक ख़ुल्द-ए-तरब-नाक का अरमाँ है ज़रूर बज़्म-ए-दोशंबा की हसरत तो नहीं है मुझ को मेरी नज़रों में कोई और शबिस्ताँ है ज़रूर
Asrar Ul Haq Majaz
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