कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी कुछ मुझे भी ख़राब होना था
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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तुम ने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया किस दिल से आह तर्क-ए-तमन्ना करे कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है
Asrar Ul Haq Majaz
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मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो तुम्हें क्या ख़ुद मुझे भी ग़म नहीं है
Asrar Ul Haq Majaz
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मिरी वफ़ा का तिरा लुत्फ़ भी जवाब नहीं मिरे शबाब की क़ीमत तिरा शबाब नहीं
Asrar Ul Haq Majaz
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ये आना कोई आना है कि बस रस्मन चले आए ये मिलना ख़ाक मिलना है कि दिल से दिल नहीं मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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