छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है
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अपनी मुट्ठी में छुपा कर किसी जुगनू की तरह हम तेरे नाम को चुपके से पढ़ा करते हैं
Aleena Itrat
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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लहजा कि जैसे सुब्ह की ख़ुश्बू अज़ान दे जी चाहता है मैं तिरी आवाज़ चूम लूँ
Bashir Badr
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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया
Tehzeeb Hafi
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एक आवाज़ पे आ जाती है दौड़ी दौड़ी दश्त-ओ-सहरा-ओ-बयाबान नहीं देखती है दोस्ती दोस्ती होती है तुम्हें इल्म नहीं दोस्ती फ़ाइदा नुक़सान नहीं देखती है
Aadil Rasheed
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तुम ने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया किस दिल से आह तर्क-ए-तमन्ना करे कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी कुछ मुझे भी ख़राब होना था
Asrar Ul Haq Majaz
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सदा दी तू ने क्या जाने कहाँ से मगर मैं जानिब-ए-दिल देखता हूँ
Asrar Ul Haq Majaz
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मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो तुम्हें क्या ख़ुद मुझे भी ग़म नहीं है
Asrar Ul Haq Majaz
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मिरी वफ़ा का तिरा लुत्फ़ भी जवाब नहीं मिरे शबाब की क़ीमत तिरा शबाब नहीं
Asrar Ul Haq Majaz
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