मोहब्बत हम सेे ऐसे पेश आती है हमें नफ़रत की ज़द में छोड़ जाती है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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इस कहानी में कहीं नाम हमारा भी तो था उस सेे कहना कि सिकन्दर कभी हारा भी तो था
Mohit Dixit
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ज़ेहन-ओ-दिल में मेरे पेच है इक फँसी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी इश्क़ है तुझ सेे या है महज़ दिल-लगी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी ये तअल्लुक़ भी आसाँ नहीं हम-सफ़र मोड़ आने हैं आएँगे आगे मगर घर पलटने का ये मोड़ है आख़िरी तुझ को जाना है तो जा चला जा अभी
Mohit Dixit
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ये शहर आम सा ही शहर है बहिश्त नहीं बस इक अज़ीज़ रहा करता था यहाँ मेरा
Mohit Dixit
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न पहला था न हूँ मैं आख़िरी ही बज़्मे-जानाँ में मगर मैं चाहता था सिलसिला मुझ पे रुका होता
Mohit Dixit
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कल भी आया था मैं खिड़की पे थे पंछी बैठे तुम को आवाज़ लगाता तो वो उड़ जाने थे
Mohit Dixit
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