मुहब्बत में बिछड़ने की ग़लत-फ़हमी हुई होगी वगरना कौन करता है बग़ावत राजधानी में
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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बिना बात के हम लड़े जा रहे हैं कि नज़दीक आने मरे जा रहे हैं
Rohit Gustakh
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ज़माने में किसी से दिल लगाकर किसी का दिल दुखाया था किसी ने
Rohit Gustakh
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तुम्हारी बज़्म हैं तो क्या करोगे इश्क़ को रुस्वा अदब से महफिलें चलती हैं हुक्मों से नहीं चलती
Rohit Gustakh
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किसी ने कह दिया जंगल बनेगा परिंदे घर बनाते फिर रहे हैं
Rohit Gustakh
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यार दिनों में रातें कौन करे निर्लज्जों से बातें कौन करे
Rohit Gustakh
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