किसी ने कह दिया जंगल बनेगा परिंदे घर बनाते फिर रहे हैं
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा
Munawwar Rana
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तुम्हारी बज़्म हैं तो क्या करोगे इश्क़ को रुस्वा अदब से महफिलें चलती हैं हुक्मों से नहीं चलती
Rohit Gustakh
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तुम्हें कैसे बताएँ हम कि कैसे हैं बिना उस के उसे बस ये बताना तुम कि अच्छे हैं बिना उस के वो पूछे तो बता देना हमारा हाल ये उस को मुकम्मल ख़्वाब आँखों में अधूरे हैं बिना उस के
Rohit Gustakh
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छोड़ गई अब के वो भी मुझ को जो सिगरेट छुड़ाया करती थी
Rohit Gustakh
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हमारे लिए बे-वफ़ा है वो लड़की तुम्हारे लिए जो अभी देवता है
Rohit Gustakh
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इक दुश्मन को साथ रखा है तू ने दुखती रग पर हाथ रखा है तू ने
Rohit Gustakh
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