मुहब्बत की कोई रंगीन चाहत भी नहीं तुम सेे कोई ग़ैरत नहीं तुम सेे कि हसरत भी नहीं तुम सेे मुझे यूँँ छोड़ कर जाते हुए इतना कहा उस ने शिकायत भी नहीं तुम सेे मोहब्बत भी नहीं तुम सेे
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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जब लगे मुश्किल है यूँँ ही मुस्कुराना लौट आना जब लगे दुनिया है कोई क़ैद-ख़ाना लौट आना
AYUSH SONI
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मेरे अहबाब कहते हैं वो तुम को याद करती है उन्हे कैसे बताऊँ अब मुझे हिचकी नहीं आती
AYUSH SONI
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सबब मेरे ग़मों का जब कभी पूछेगी वो मुझ सेे मैं उस की ओर देखूँगा ज़रा सा मुस्कुरा दूँगा
AYUSH SONI
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आँखों से रात भर यहाँ बहती है इक नदी मैं सुब्ह फ़स्लें सींचता हूँ उस के आब से
AYUSH SONI
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मेरे हम उम्र साथी इश्क़ में गर टूट जाए दिल ग़म-ए-हिज्राँ में इक महफ़िल सजाना, शा'इरी करना
AYUSH SONI
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