मुझ को ख़्वाहिश है उसी शान की दिवाली की लक्ष्मी देश में उल्फ़त की शब-ओ-रोज़ रहे देश को प्यार से मेहनत से सँवारें मिल कर अहल-ए-भारत के दिलों में ये 'कँवल' सोज़ रहे
sherKuch Alfaaz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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