na ibtida ki khabar hai na intiha malum raha ye wahm ki hum hain so wo bhi kya malum translation neither the beginning, nor the end do i know, as for this illusion that i am, but do i really know. sagar akbarabadi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
Fani Badayuni
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अब न काँटों ही से कुछ लाग न फूलों से लगाओ हम ने देखा है तमाशा तेरी रा'नाई का
Fani Badayuni
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इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का ज़िन्दगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का
Fani Badayuni
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उम्मीद के वादों से जी कुछ तो बहलता था अब ये भी तेरे ग़म को मंज़ूर नहीं होते
Fani Badayuni
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हर मुसीबत का दिया एक तबस्सुम से जवाब इस तरह गर्दिश-ए-दौराँ को रुलाया मैं ने
Fani Badayuni
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