नदी मिरे भोले साजन के गालों को छू कर बतलाना दूर किनारे खड़ी तुम्हारी सजनी बोसा भेज रही है
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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी
Jaun Elia
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अब के सावन में शरारत ये मिरे साथ हुई मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई
Gopaldas Neeraj
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तू इस तरह से मिरे साथ बे-वफ़ाई कर कि तेरे बा'द मुझे कोई बे-वफ़ा न लगे
Qaisar-ul-Jafri
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मोच गया दिल आज हमारा उन के गालों के गड्ढों में
Rohit Gustakh
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ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
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मुझ को तो अच्छे लगते हैं दुविधा पीर उदासी आँसू
Shiva awasthi
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गले से यूँँ मुझे लगाओ कभी, कि मेरी पसलियाँ चटख जाएँ
Shiva awasthi
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रोती हूँ तो साथ साथ में बजते हैं वो पायल में ऐसे घुॅंघरू बाॅंध गया
Shiva awasthi
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वो तो काँधे पर सिर रख कर लौट गई पर गेसू अब भी मफ़लर से लिपटे हैं
Shiva awasthi
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तुम भी दूर नहीं कर सकते अब तुम को खो देने का दुख
Shiva awasthi
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