नहीं मैं रह नहीं सकता यहीं मैं कह नहीं सकता किनारा है तभी हूँ मैं नहीं तो बह नहीं सकता पुरानी एक इमारत हूँ कि क्या देखा नहीं मैं ने किसी के छोड़ जाने से तो मैं यूँँ ढह नहीं सकता
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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ये तो ख़ुद की ग़लती थी शिकायत किस को करना है लो तुम ज़िन्दगी रख लो मुझे तो रोज़ मारना है जाने कैसी घड़ी थी वो मिले तुम जिस में आ कर के तब जो ले गए थे तुम अब उसे ता-उम्र भरना है
Praveen Bhardwaj
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ये फूल तेरे बाग़ के बस नाम के ही फूल हैं तुम खिल रहे हो जैसे वैसे कोई भी खिलता नहीं
Praveen Bhardwaj
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मेरे रहते छू न दे कमबख्त कोई हवा ये आग मेरे बा'द भी जलती रहे
Praveen Bhardwaj
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मेरी जाँ कोई ज़ुल्म न कर ख़ुदा के लिए यहाँ कोई ग़ुरूर नहीं रहता सदा के लिए
Praveen Bhardwaj
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तुम को नज़र अंदाज़ करता ज़िंदगी में करता नइँ तुम कर रहे जो इश्क़ में मैं दुश्मनी में करता नइँ
Praveen Bhardwaj
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