नई है मंजिले मेरी मुझे ना टोको अब मुझे तो साथ बिठाकर कही पे रुक जाओ
Related Sher
जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते हैं कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई?
Umair Najmi
109 likes
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
111 likes
तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
Charagh Sharma
99 likes
मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
228 likes
मैं चाहता था मुझ सेे बिछड़ कर वो ख़ुश रहे लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे
Umair Najmi
99 likes
More from Kashif Hussain Kashif
ये जिस्मों को तुम ने लिबासों में रख कर हया की है देखो क़सम झूठी खाई
Kashif Hussain Kashif
2 likes
उस ने जिस आजिज़ी में डाल दिया मेरा अपना ही तजरबा था कहीं
Kashif Hussain Kashif
2 likes
ज़ाहिद तेरे ख़याल में किस ने ख़लल है दी बाक़ी रहा ये दिल में कही बस मलाल है
Kashif Hussain Kashif
2 likes
उस की मर्ज़ी जिसे तवक़्क़ो दे ये तो बस एक है समाँ मेरा
Kashif Hussain Kashif
2 likes
तेरे इन नकाबों में दुनिया बसी है मेरी चाहतों में तो बस बेबसी है
Kashif Hussain Kashif
2 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Kashif Hussain Kashif.
Similar Moods
More moods that pair well with Kashif Hussain Kashif's sher.







