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साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं

Bashir Badr

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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है

Dushyant Kumar

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यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

Nida Fazli

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उदास रहने से ग़ज़लों में जान आती है सो पूरा ध्यान लगाकर उदास रहने लगे

Nadim Nadeem

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मत पूछो कितना ग़मगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज़्यादा तुम को याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अमरोहे में बान नदी के पास जो लड़का रहता था अब वो कहाँ है मैं तो वहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी

Jaun Elia

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