नज़र को घुमाओ ज़रा और देखो कि मौजूद किरदार इक-इक यहीं है तुम्हारी कहानी हक़ीक़त अगर है हमारा भी क़िस्सा ख़याली नहीं है
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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मंज़िलों का कौन जाने रहगुज़र अच्छी नहीं उस की आँखें ख़ूब-सूरत है नज़र अच्छी नहीं
Abrar Kashif
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तेरी तस्वीर हट जाएगी लेकिन नज़र दीवार पर जाती रहेगी
Tehzeeb Hafi
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ये चुपके चुपके न थमने वाली हँसी तो देखो वो साथ है तो ज़रा हमारी ख़ुशी तो देखो
Shariq Kaifi
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रास्ता जब इश्क़ का मौजूद है फिर किसी की क्यूँँ इबादत कीजिए? ख़ुद-कुशी करना बहुत आसान है कुछ बड़ा करने की हिम्मत कीजिए
Bhaskar Shukla
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ज़रूरत क्या तिजारत-गार को ख़ुद हाथ रँगने की ठिकाने कुछ लगाना हो अगर सरकार बैठी है
Mohit Subran
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ज़रा से शक पे हुआ ख़त्म राब्ता लेकिन ज़रा सा शक न हुआ ख़त्म दरमियाँ से मगर
Mohit Subran
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यूँँ पाँव पाँव चला उम्र भर मगर देखो चला जहाँ से था मैं लौट के वहीं पहुँचा नहीं ये बात नहीं तय सफ़र किया ही नहीं रहा सफ़र में ही फिर भी कहीं नहीं पहुँचा
Mohit Subran
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ये एक सच कि मुसलसल हमारे हिस्से में वही तो ज़िन्दगी आई जो हम ने चाही नहीं
Mohit Subran
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ये दुनिया एक मंडी है नहीं इस के सिवा कुछ भी यहाँ जिस को भी देखो बिकने को तैयार बैठा है
Mohit Subran
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