पाने को तो सारी दुनिया भी कम है खोने को इक शख़्स बहुत है दुनिया में
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं वही दुनिया बदलते जा रहे हैं
Jigar Moradabadi
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याद उसी को करते रहना जिस का आना मुश्किल हो प्यार उसी से करते रहना जिस का मिलना ना-मुमकिन
Sanskar Shrivastav
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वो जो आँख मिलाता है भगवानों से तेरे आगे वो लड़का झुक जाता है
Sanskar Shrivastav
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वो दयालु हैं हमें अमृत ही देंगे भाग में विष हमारे भाग में होगा तो शिव पी जाएँगे
Sanskar Shrivastav
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वो इन आँखों को मयखाना कहते हैं तेरी आँखें तो कान्हा का मंदिर है
Sanskar Shrivastav
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उसको क्या मतलब होगा तेरे दिल से तेरा आशिक़ तेरा सीना माँगेगा
Sanskar Shrivastav
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