पहले सिर्फ़ तेरे बारे में ही सोचा करते थे अब तेरे बारे में सिर्फ़ कभी सोचा करते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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उतना बाक़ी हूँ मैं ज़रा सा मुझ में जितना बाक़ी है तेरा आना मुझ में उस दिन ख़ुद को छोड़ निकल जाऊँगा जब पूरा का पूरा वो होगा मुझ में
Sanjay Vyas 'Sahiba'
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उस ने माना नहीं ख़ुदा का ये एक फ़रमान आदम ने सेब तोड़ने की हिमाक़त की है
Sanjay Vyas 'Sahiba'
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शादी में बुलाते हैं दोस्त को आशिक़ और दीवानों को नहीं
Sanjay Vyas 'Sahiba'
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मुश्किल है मुहब्बत का यूँँ पैग़ाम हो जाना हर इक को मुयस्सर नहीं ‘इरफ़ान’ हो जाना
Sanjay Vyas 'Sahiba'
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मैं ने लिखा है ख़ुद ही ये मुक़द्दर हाथों की लकीरें मिटा दी मैं ने
Sanjay Vyas 'Sahiba'
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