पस-मंज़र में 'फ़ीड' हुए जाते हैं इंसानी किरदार फ़ोकस में रफ़्ता रफ़्ता शैतान उभरता आता है
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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शे'र अच्छे भी कहो सच भी कहो कम भी कहो दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो
Abdul Ahad Saaz
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दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जाना दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना
Abdul Ahad Saaz
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बुरा हो आईने तेरा मैं कौन हूँ न खुल सका मुझी को पेश कर दिया गया मेरी मिसाल में
Abdul Ahad Saaz
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बचपन में हम ही थे या था और कोई वहशत सी होने लगती है यादों से
Abdul Ahad Saaz
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आई हवा न रास जो सायों के शहर की हम ज़ात की क़दीम गुफाओं में खो गए
Abdul Ahad Saaz
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