पास रख सँभाल कर मेरे अदू इस तीर को रख लिया है बाँध कर मैं ने बदन से पीर को
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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उम्र भर सामने नज़रो के उसे रखना था मैं ने उस चाँद की तस्वीर पे आँखें रख दी
Lokesh Singh
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ज़ीस्त में जब भी कभी घबरा गया आप की मौजूदगी महसूस की
Lokesh Singh
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जलता रहा चराग़ बयाबान में जहाँ हम भी चले गए वहाँ पर बेबसी के साथ
Lokesh Singh
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सताती बहुत है बदन की उदासी यहाँ कौन रोता है अपनी ख़ुशी से
Lokesh Singh
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बाँध दे शोर को पैरों तले अब तू भी बशर ज़िस्म को छोड़ के वीरान कहाँ जाता है
Lokesh Singh
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