बाँध दे शोर को पैरों तले अब तू भी बशर ज़िस्म को छोड़ के वीरान कहाँ जाता है
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अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता
Tehzeeb Hafi
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वो शांत बैठा है कब से मैं शोर क्यूँ न करूँ बस एक बार वो कह दे कि चुप तो चूँ न करूँ
Charagh Sharma
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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ऐसे हालात से मजबूर बशर देखे हैं अस्ल क्या सूद में बिकते हुए घर देखे हैं हम ने देखा है वज़ादार घरानों का जवाल हम ने सड़कों पे कई शाह ज़फ़र देखे है
Mehshar Afridi
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काम के बोझ तले दब गए तो समझे हम लोग क्यूँँ चाह के भी दिल का नहीं कर पाते
Jangveer Singh Rakesh
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ज़ीस्त में जब भी कभी घबरा गया आप की मौजूदगी महसूस की
Lokesh Singh
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उम्र भर सामने नज़रो के उसे रखना था मैं ने उस चाँद की तस्वीर पे आँखें रख दी
Lokesh Singh
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सताती बहुत है बदन की उदासी यहाँ कौन रोता है अपनी ख़ुशी से
Lokesh Singh
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इक तबाही गुजर रही अंदर देख क्या से क्या हो गया हूँ मैं
Lokesh Singh
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ढूंढ कर लाओ उसे और जहाँ में भर दो आज दुनिया में फ़रिश्तों की जगह ख़ाली है
Lokesh Singh
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