पत्थर से आलिंगन का अनुभव लिक्खा सालों बा'द लिखा कुछ तुम पर जानेमन
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पर्वतों को ज़ख़्म गहरे दे दिए हैं पानियों से पत्थरों पर वार कर के
nakul kumar
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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वो जिस तरह से नाम मेरा लेती है मुझे लगता है मेरे होने से दुनिया जहान है
Gaurav Singh
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सारी दुनिया जान रही है ख़ुश रहना बस एक भरम है
Gaurav Singh
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दुनिया घूम रही है या'नी मेरे दोस्त कोई तो है जो चाक घुमाता रहता है
Gaurav Singh
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दिल की बातों में आके हम तुम को याद करते हैं भूल जाते हैं
Gaurav Singh
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हम तो केवल दिल के छाले गाते हैं बंदे को सब यूँ ही शाइ'र कहते हैं
Gaurav Singh
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