पर्वतों को ज़ख़्म गहरे दे दिए हैं पानियों से पत्थरों पर वार कर के
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रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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हर बार मुझे हर साँस मिरी इक बात यही समझाती है कुछ काम करो कुछ नाम करो ये उम्र निकलती जाती है मैं कहता हूँ कि समझो तो कोई बात नहीं ऐसी लेकिन इस दुनिया में शोहरत की हवस मुझे अंदर से खा जाती है
nakul kumar
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ये दिन महीने साल ये रातों का क्या करुँ चुभने लगी हैं अब तिरी बातों का क्या करुँ ये रात हैं जो सात ये मुश्किल से हैं कटीं ये दिन भी तो हैं सात ही सातों का क्या करुँ
nakul kumar
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कौन तेरे घर की दीवारें चौखट चूमेगा कौन तेरी आँखों में अपनी आँखें रोपेगा
nakul kumar
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माचिस की तीली की मुआफ़िक़ सर पे आग लिए फिरता हूँ आग लगानी है दुनिया को इतना हूँ बेताब समझ लो
nakul kumar
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सोच कर ये मन की मन में मार देते हैं सभी ख़ास बातें हर किसी से तो कही जाती नहीं
nakul kumar
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