फिर से मक़्तल में बहाएा है लहू क़ातिल का फिर ये उम्मीद है अब कोई न मारा जाए
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तू न मायूस होना मुझे दे के ग़म ग़म रखे हैं कुछ और ख़ुद-कुशी के लिए
Sanjay Bhat
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तन्हाई में यूँँ तन्हा मैं नज़र आया हूँ मैं जैसे मैं नहीं उजड़ा कोई साया हूँ
Sanjay Bhat
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था जुनूँ दिल में असर जाने तक दिल की दिल में रही नक़्स आने तक
Sanjay Bhat
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रात पुरनम है तपती सहर चाहिए वो सहर अब मुझे पुरअसर चाहिए
Sanjay Bhat
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नहीं लफ़्ज़ का इस क़दर ज़ोर है ज़िंदगी पर कि मुमकिन नहीं एक भी हाँ मिरी ज़िंदगी में
Sanjay Bhat
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