पिता के काँधे पर बैठा हुआ हूँ गगन छूने को इक मौक़ा' मिला है
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के, ज़रा नीची नज़र कर के ये कहता हूँ अभी तुम से, मोहब्बत हो गई तुम से
Zubair Ali Tabish
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इश्क़ में ये दावा तो नईं है मैं ही अव्वल आऊँगा लेकिन इतना कह सकता हूँ अच्छे नंबर लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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तुम्हारी लाल चूनर,लाल लाली,लाल बिंदिया को क़सम से देख कर बेजा नशे में चूर बैठा हूँ
Shivsagar Sahar
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इक ऐसा माहौल बनाया है हम ने बच्चे हँसते हँसते पढ़ने आते हैं
Shivsagar Sahar
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दिल पे सिक्का जमा नहीं पाया इतनी हिम्मत जुटा नहीं पाया मेरी इस आशिक़ी पे लानत है उस को पागल बना नहीं पाया
Shivsagar Sahar
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हमारी रूह पापी जिस्म में कब तक नहाएेगी चलो संगम नहा आएँ इलाहाबाद में जानाँ
Shivsagar Sahar
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तू बिल्कुल ऐसी ही अच्छी दिखती है चेहरे पर मेकअप ही मत लगवाया कर
Shivsagar Sahar
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