साॅरी उस ने मुझे कहा है फिर या'नी अब कुछ तो हादसा है फिर
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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तुम्हारे क़दमों को जब चूमती हूँ लगता है ऐसा कोई जोगन किसी दरगाह की चौखट को चू में है
Firdous khan
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लाश बिस्तर से देखती है उसे रूह लटकी हुई है पंखे पर
Firdous khan
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कितना मुश्किल है ना हर साल सफ़र पर होना संग-ए-मील आख़िरी बन जाना दिसम्बर होना
Firdous khan
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ज़ेहन में शोर-शराबे अक्सर दिल में सन्नाटे करते हैं
Firdous khan
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तुम्हारा फ़ोन ख़ुद काटूँ तो ये महसूस होता है कि जैसे आख़िरी साँसों को गिनते ख़ुद-कुशी कर ली
Firdous khan
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