रहेगा इश्क़ कब तक रूह में यारो यहाँ अब जिस्म को भी घर बनाने दो
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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नहीं होते मुफ़्लिस सुख़न-वर सभी कई साल दिल्ली 'ज़फ़र' की रही
Saurabh
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उम्र भर हम को यही इक काम दे दो देखने को रोज़ ढलती शाम दे दो
Saurabh
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शा'इरी घूमती है इसी में फ़लसफ़ा और दिल का फ़साना
Saurabh
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कुछ दिन बा'द तो ये भी न बोला जाएगा जो भी होगा आगे देखा जाएगा
Saurabh
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जिन का भी पहनावा सादा होगा उन्हें बदन का इल्म ज़ियादा होगा
Saurabh
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