sherKuch Alfaaz

रौशन आग़ाज़-ए-इश्क़ है ये इक तरफ़ा चाहत होगी ही महबूब अगर अच्छा है तो खोने की दहशत होगी ही इस बे-ग़ैरत दुनिया में इक मुफ़्लिस उम्मीद लगा बैठा हो देर भले साहिब लेकिन अल्लाह की रहमत होगी ही

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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो

Jawwad Sheikh

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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में

Jaun Elia

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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा

Tehzeeb Hafi

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ये फ़िल्मों में ही सब को प्यार मिल जाता है आख़िर में मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता चलो माना कि मेरा दिल मेरे महबूब का घर है पर उस के पीछे उस के घर में क्या-क्या कुछ नहीं होता

Tehzeeb Hafi

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और क्या चाहती है गर्दिश-ए-अय्याम कि हम अपना घर भूल गए उन की गली भूल गए

Jaun Elia

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