ro ro ke log kahte the jati rahegi aankh aisa nahin hua, meri binai badh gai
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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हमारे ख़ौफ़ से बाज़ार उछलते हैं जहाँ भर में सिसकने से हमारे कौन सी सरकार गिरती है
Nomaan Shauque
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वो मेरे लम्स से महताब बन चुका होता मगर मिला भी तो जुगनू पकड़ने वालों को
Nomaan Shauque
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किस ने हमारे शहर पे मारी है रौशनी हर इक मकाँ के ज़ख़्म से जारी है रौशनी
Nomaan Shauque
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तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे देखते रहते हैं दीवार से जाते हुए हम
Nomaan Shauque
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हम में जितने राम हैं सब बन-वास पे हैं हम में जितने रावण हैं सब राजा हैं
Nomaan Shauque
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