रोज़-ए-जुमा मोमिन अदा कर के नमाज़ जाता कही ज़ीशान में हो के सवार
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मेरे हुजरे में नहीं और कहीं पर रख दो आसमाँ लाए हो ले आओ ज़मीं पर रख दो
Rahat Indori
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
Ahmad Faraz
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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ज़ाहिद तेरे ख़याल में किस ने ख़लल है दी बाक़ी रहा ये दिल में कही बस मलाल है
Kashif Hussain Kashif
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ये जिस्मों को तुम ने लिबासों में रख कर हया की है देखो क़सम झूठी खाई
Kashif Hussain Kashif
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मैं उस की याद ही के जनाज़े को ढो रहा या'नी कि मेरी रूह को आराम मिल गया
Kashif Hussain Kashif
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मैं ही था पागल कहीं ख़ुद मेरे ही इमकान से तोड़ जाता दिल मेरा ही कितने इत्मीनान से
Kashif Hussain Kashif
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तुम्हारे है दामन में बस जी-हुज़ूरी ये सारी रिफ़ाक़त तो हम को मिली है
Kashif Hussain Kashif
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