साल दर साल उम्र घटती है और इक साल ढल गया मेरा शौक़ से याद कर लिया रब को और फिर दम निकल गया मेरा
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी ख़्वाब मत दिखाया कर है गुज़ारिश उदास लोगों की
Sabir Pathan
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ज़िंदगी ढूँढ़ने निकल आए रौशनी ढूँढ़ने निकल आए
Sabir Pathan
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तुम बहुत ही हसीन हो लड़की चाँद भी शर्म शार है ख़ुद पर
Sabir Pathan
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रूठ जाता अगर मनाते तुम छोड़ कर शहर जो न जाते तुम
Sabir Pathan
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सफ़र आसान था चलता रहा राही चले जाओ कि दिल आवाज़ देता है
Sabir Pathan
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