सामने वो यूँँ मिरे डब्बा टिफ़िन का रखती थी जैसे थाली खाने की बीवी लगाकर देती है बाग के सब फूल मालन मुरझा ना जाएँ यूँ भी तू नज़र नईं डाले, बस पानी लगाकर देती है
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यूँँ जो तकता है आसमान को तू कोई रहता है आसमान में क्या
Jaun Elia
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
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ये मुहब्बत की किताबें कौन यूँँ कब तक पढ़े कौन मारे रोज़ ही इक बात पे अपना ही मन
nakul kumar
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मिरी ग़ज़ल की तरह उस की भी हुकूमत है तमाम मुल्क में वो सब से ख़ूब-सूरत है बहुत दिनों से मिरे साथ थी मगर कल शाम मुझे पता चला वो कितनी ख़ूब-सूरत है
Bashir Badr
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जिस को हर बात बुरी लगती है अब के मेरी उस सेे मिलता था हर इक बात पे बोसा पहले
Aarush Sarkaar
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वो अपने सर 'प घूंघट को सजाकर के है बैठी कोई पण्डित है जो कुछ बड़बड़ाए जा रहा है
Aarush Sarkaar
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ये निगाहें हैं हमारी हाँ मगर रहते हैं याँ ख़्वाब सारे आप के
Aarush Sarkaar
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मर्ज़ी से तो पैमाना, हम ने ना रखा होगा सामने कोई फ़ोटो भी रखी गई होगी
Aarush Sarkaar
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ऐसा इक बाँकपन है उस में के नक़्ल करती है हर कली उस की
Aarush Sarkaar
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