वो अपने सर 'प घूंघट को सजाकर के है बैठी कोई पण्डित है जो कुछ बड़बड़ाए जा रहा है
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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पहले बेचारी आँखों के निखार उतरते होंगे तब जा कर इन आँखों से त्योहार उतरते होंगे
Aarush Sarkaar
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सामने वो यूँँ मिरे डब्बा टिफ़िन का रखती थी जैसे थाली खाने की बीवी लगाकर देती है बाग के सब फूल मालन मुरझा ना जाएँ यूँ भी तू नज़र नईं डाले, बस पानी लगाकर देती है
Aarush Sarkaar
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मत कहो मिरे हमदम ये कि राएगाँ हो तुम इक जहाँ के बंदे का, यार दो जहाँ हो तुम
Aarush Sarkaar
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जिस को हर बात बुरी लगती है अब के मेरी उस सेे मिलता था हर इक बात पे बोसा पहले
Aarush Sarkaar
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कुँए में चलो कूद जाते हैं दोनों तभी इस ज़माने को राहत बचेगी
Aarush Sarkaar
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