मत कहो मिरे हमदम ये कि राएगाँ हो तुम इक जहाँ के बंदे का, यार दो जहाँ हो तुम
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है
Munawwar Rana
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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सामने वो यूँँ मिरे डब्बा टिफ़िन का रखती थी जैसे थाली खाने की बीवी लगाकर देती है बाग के सब फूल मालन मुरझा ना जाएँ यूँ भी तू नज़र नईं डाले, बस पानी लगाकर देती है
Aarush Sarkaar
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मर्ज़ी से तो पैमाना, हम ने ना रखा होगा सामने कोई फ़ोटो भी रखी गई होगी
Aarush Sarkaar
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ये सोचते हुए ही तो मुरझा गए हैं हम गर हम सेफ़र नहीं तो तेरे क्या लगे हैं हम
Aarush Sarkaar
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ये निगाहें हैं हमारी हाँ मगर रहते हैं याँ ख़्वाब सारे आप के
Aarush Sarkaar
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लाने को तो चाँद सितारे लाएँगे जान लाने वाले पर हम इकलौते हैं तुझ पर अपना ईमान लाने वाले
Aarush Sarkaar
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